कभी आपने महसूस किया है! मगर मैंने तो महसूस किया है मेरा आईना मुझसे बातें करता है, आप मानो या न मानो, ये आईना मझसे बातें करता है, हर बात है उसकी मतवाली, जब खड़े हो सामने उसके, खुद हॅसने लगता है, मेरा आईना मुझसे बाते करता है, वो हर पल पल सुबहोशाम, मेरा इंतज़ार करता है, कब मैं जाऊँ उसके सामने, कब मैं सिंगार करूँ, कब वो मुझे निहारे, कब मैं उसे निहारूँ, यह देखकर खुश होता रहता है, मेरा आईना मुझसे बाते करता है, ये सोच कर वो भी हँसता है, ये सोच कर मैं भी हँसता हूँ, यह पागल है या मैं पागल हूँ, मेरा आईना मुझसे बातें करता है, सच मानो या ना मानो, ये आईना मुझसे बातें करता है, |
Monday, June 20, 2011
"आईना" (सुरेश राजपूत)
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कविता
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बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!
ReplyDelete--
राजपूत जी!
आइना मासूम लोगों से ही बातें करता है!
ये सोच कर वो भी हँसता है,
ReplyDeleteये सोच कर मैं भी हँसता हूँ,
यह पागल है या मैं पागल हूँ,
मेरा आईना मुझसे बातें करता है,
सच मानो या ना मानो,
ये आईना मुझसे बातें करता है,
satya kaha anupmansh ji aaina bate karta hai.
बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
ReplyDeleteआइना मासूम लोगों से ही बातें करता है|
ReplyDeleteबहुत सुन्दर प्रस्तुति।