Friday, June 17, 2011

सागर

ऐ सागर तू कैसा हैं, 
सब को समा लेता है,
हर किसी को अपना लेता है,
इसीलिए तुझे सागर कहते हैं,


लेकिन तू तो है बहुत महान् ,
हर किसी को बना लेता है अपनी शान,
तेरी है ये अज़ब कहानी,
यह बात किसी ने ना जानी,
लेकिन तू तो बहुत महान्,
तू कितना गहरा है, 
यह तुझे नही मालूम,
तेरी गहराई को मापती है 
दुनिया हर दम.
मगर फिर भी है
बहुत सी जानकारियों से अनजान
इसीलिए तो तू है बहुत महान्.

6 comments:

  1. बहुत सुन्दर रचना!
    आप लिखते रहिए
    और हम पढ़ते रहेंगे!

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  2. आपकी यह उत्कृष्ट प्रवि्ष्टी कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी है!

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  3. बहुत सुन्दर रचना!सुन्दर अभिव्यक्ति.....

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  4. अच्छी प्रस्तुति...बधाई

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  5. आपकी यह पोस्ट आज के (शुक्रवार, ११ अप्रैल, २०१४) ब्लॉग बुलेटिन - मसालेदार बुलेटिन पर प्रस्तुत की जा रही है | बधाई

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