Friday, June 17, 2011

सागर

ऐ सागर तू कैसा हैं, 
सब को समा लेता है,
हर किसी को अपना लेता है,
इसीलिए तुझे सागर कहते हैं,


लेकिन तू तो है बहुत महान् ,
हर किसी को बना लेता है अपनी शान,
तेरी है ये अज़ब कहानी,
यह बात किसी ने ना जानी,
लेकिन तू तो बहुत महान्,
तू कितना गहरा है, 
यह तुझे नही मालूम,
तेरी गहराई को मापती है 
दुनिया हर दम.
मगर फिर भी है
बहुत सी जानकारियों से अनजान
इसीलिए तो तू है बहुत महान्.

Thursday, June 16, 2011

चर्चा मंच: "आओ, जी लें" (चर्चा मंच-548)

चर्चा मंच: "आओ, जी लें" (चर्चा मंच-548)

" इस सदी का बेबस चाँद"

" इस सदी का बेबस चाँद"
कल मैंने
चाँद पर लगा ग्रहण देखा,
तब मुझे महसूस हुआ,
आज चाँद अपनी छवि से दूर है,
चाँद अपनी छवि को खोकर,
अपनी छवि से द्दूर हो गया, 
सबने भी महसूस किया, 

चाँद कितना बेबस था,
यह चाँद को ही मालूम था,
कभी सफेद रंग मे आता,
तो कभी काले रंग मे,
कभी लाल रंग में
तो कभी पीले रंग में
अन्त में वो लीन हो गया,
फिर किया था,
फिर-
एक नया रंग था,
और नयी सुबह थी,
अब लगा-
यह बेबस चाँद नही,
यह तो वही चाँद है,
जो कल मैंने देखा था.
 
 

Wednesday, June 15, 2011

"अनुपमांश ब्लॉग का लोकार्पण" (सुरेश राजपूत)


मित्रों!
आज अपने गुरुवर
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" जी की अनुकम्पा से
मैंने अपना यह ब्लॉग बना लिया है!
इसका नाम भी गुरू जी ने बहुत सार्थक रखा है
अनुपमा मेरी जीवनसंगिनी
अंश मेरा प्यारा सा बेटा
और SH. से मेरा नाम शुरू होता है, सुरेश 
अनुपमांश का लोकार्पण भी 
आदरणीय "मयंक" जी के कर-कमलों से
लगाई गई इस पोस्ट से सम्पन्न हो रहा है!