ऐ सागर तू कैसा हैं,
सब को समा लेता है,
हर किसी को अपना लेता है,इसीलिए तुझे सागर कहते हैं,
लेकिन तू तो है बहुत महान् ,
हर किसी को बना लेता है अपनी शान,
तेरी है ये अज़ब कहानी,
यह बात किसी ने ना जानी,
लेकिन तू तो बहुत महान्,
तू कितना गहरा है,
तू कितना गहरा है,
यह तुझे नही मालूम,
तेरी गहराई को मापती है दुनिया हर दम.
मगर फिर भी हैबहुत सी जानकारियों से अनजान
इसीलिए तो तू है बहुत महान्.




